आज के फैशन के युग में युवा का सबसे बड़ा सगल नशा है। आज अपने आप को माचो मैन दिखाने के लिए युवा सिगरेट, शराब का सेवन कर रहे हैं। इससे उनका समझना है कि यदि आप इस तरह का काम नहीं किये है तो आप ने जिंदगी नहीं जीया हैं। एक अनुमान के अनुसार सबसे ज्यादा सिगरेट और शराब का सेवन 16 से 30 साल के लोग कर रहे हैं। उसमें भी मेट्रो शहरों में 70% खपत सिगरेट और शराब की हो रही है। आज के युवा वर्ग को क्या हो गया है पता नहीं चलता।
वो अपना भविष्या चौपट कर रहे हैं। आज के युवा कल के देश के भविष्य हैं। यदि एक बात और देखा जाए तो पता चलेगा की मेट्रो शहर के युवा ही नहीं गांव में रहने वाले युवा भी नशे में गिरफ्त हो रहे हैं। गांव में तो गांजा, चरस, बीड़ी, भांग का सेवन करके नशा कर रहे हैं। पता नहीं देखा-देखी से शुरू करने वाला नशा कब आदत में शामिल हो जाता है। जिसे छोड़ना बड़ा ही मुश्किल हो जाता है। एक अध्ययन के मुताबिक देखा देखी में ध्रुमपान शुरू करने वालो में से 98% कभी भी इस आदत से मुक्त नहीं हो पाते है। जिसे छोड़ना बड़ा मुश्किल हो जाता है। कॉलेज के छात्र तो सगल में सिगरेट और शराब का सेवन करने लगते है।
इस उपभोक्तावादी युग में जहां पैसे की कोई कमी नहीं हो और मंहगी गाड़ी में चलना पैशन हो तो सिर्फ नशा ही उसे अपनी ओर आकर्षित करता है। आज बड़े-बड़े शहरों में डिस्को नाईट क्लब का खुलना और देर रात तक मस्ती करना भी नशे का का अहम कारण है। जेसिका लाल हत्याकांड इसी का जीता जागता उदाहरण है। आज बड़े शहरों में रेव पार्टी का आयोजन होता है। इससे नशा करने का नया तरीका खोज लिया गया है। इससे कोकिन, ब्राउन सुगर जैसे मंहगे नशे का पदार्थ इस्तेमाल किया जाता है। जो इस देश में गैर-कानूनी है और इसमे कड़ी-से –कड़ी सजा का प्रावधान है लेकिन फिर भी अभी तक की पार्टी पर रोक नहीं लगाया सका है। आज जहां भी देखा जाए युवा वर्ग शराब पीकर गाड़ी चलाते है जिससे दुर्घटना बढ़ रही हैं। इसका एक उदाहरण 2004 की है जब कथित तौर पर शराब पीकर सलमान खान ने फुटपाथ पर सोये लोगों पर गाड़ी चढ़ा दी। आज सबसे ज्यादा कैंसर के मरीज भारत में हैं क्योंकि लोग धड़ल्ले से सिगरेट और शराब का सेवन कर रहे हैं।
आज सरकार को नशे की सामग्री पर रोक लगानी चाहिए क्योंकि हम आज अपने युवा वर्ग को अपने भविष्य को बचा सकते हैं वहीं नशा मुक्त भारत बना सकते है।
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