Wednesday, February 2, 2022
सुबह की पहली किरण दिन के शुरुआत की पहली दस्तक
ऐसा लगता है मानों प्रकृति अपने अलार्म के साथ सबको जगाने आयी है।
तभी केतली और गिलास के खनकने की आवाज़
फिर गर्म चाय की खुशबू और तब शुरू होती है ज़िन्दगी , चाय की चुस्की और अख़बार की खबरों के साथ।
व्यक्ति की व्यस्तता के साथ street food का नज़ारा।
भागदौड़ से भरी ज़िन्दगी सुबह होते ही इतनी व्यस्त हो जाती है मानो इसके बीतने का अहसास हो गया है।
काम पर पहुंचने की जल्दी, स्कूल जाने की जल्दी ,तब ठहरती है ,शांति होती है जब इंसान भूखा होता है और वो भी ऐसा की उसे कुछ मिल जाये बस मिल जाये। भी
ऐसे में बहुत सारे लोगों का सहारा है street food street अलग जायके अलग।
वैसे तो देश के हर शहर का अपना ही अलग जायका है।
पर पटना के जायकों की बात ही कुछ अलग है। इसमें मौलिकता है ,मिटटी की खुशबू है।
कई चटपटे जायकों के बीच सबसे मशहूर है लिट्टी और साथ में आलू ,बैगन ,प्याज ,टमाटर का भरता यानि चो
जी गरम गरम लिट्टी और चोखा।
अपने राज्य में आये व्यापारियों को अपने राज्य से दूर रखते थे ,इन्हें खुद अपना भोजन तलाश कारण ापडता था और इसी से लिट्टी चोखा जैसे स्वादिस्ट भोजन की शुरुआत हुई।
जो अब पुरे बिहार ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में मिलता है।
ऐसा लगता है मानों प्रकृति अपने अलार्म के साथ सबको जगाने आयी है।
तभी केतली और गिलास के खनकने की आवाज़
फिर गर्म चाय की खुशबू और तब शुरू होती है ज़िन्दगी , चाय की चुस्की और अख़बार की खबरों के साथ।
व्यक्ति की व्यस्तता के साथ street food का नज़ारा।
भागदौड़ से भरी ज़िन्दगी सुबह होते ही इतनी व्यस्त हो जाती है मानो इसके बीतने का अहसास हो गया है।
काम पर पहुंचने की जल्दी, स्कूल जाने की जल्दी ,तब ठहरती है ,शांति होती है जब इंसान भूखा होता है और वो भी ऐसा की उसे कुछ मिल जाये बस मिल जाये। भी
ऐसे में बहुत सारे लोगों का सहारा है street food street अलग जायके अलग।
वैसे तो देश के हर शहर का अपना ही अलग जायका है।
पर पटना के जायकों की बात ही कुछ अलग है। इसमें मौलिकता है ,मिटटी की खुशबू है।
कई चटपटे जायकों के बीच सबसे मशहूर है लिट्टी और साथ में आलू ,बैगन ,प्याज ,टमाटर का भरता यानि चो
जी गरम गरम लिट्टी और चोखा।
अपने राज्य में आये व्यापारियों को अपने राज्य से दूर रखते थे ,इन्हें खुद अपना भोजन तलाश कारण ापडता था और इसी से लिट्टी चोखा जैसे स्वादिस्ट भोजन की शुरुआत हुई।
जो अब पुरे बिहार ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में मिलता है।
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