Thursday, October 25, 2012

पटना: इतना गंदा क्यों ?

देखो जरा, बिहार की राजधानी है, लेकिन जिधर देखो गंदगी का अंबार लगा है | साफ सफाई का तो नामो– निशान तक नहीं है | जब राजधानी का ही ये हाल है तो बाकि शहरों की बात ही क्या | पता नहीं प्रशासन क्या करता रहता है ?”
पटना की सड़कों पर आते- जाते हम सभी के मन में ऐसी बातें आती हैं | कई बार इस गंभीर समस्या के विषय में हम आपस में चर्चा भी करते हैं | कभी इसका समाधान ढूंढने की कोशिश करते हैं, तो कभी बातें यूं ही आई- गई हो जाती हैं | और हममें से ज्यादातर लोग इसके लिए केवल सरकार और प्रबंधन को ही जिम्मेदार ठहराते हैं | कुछ हद तक सही भी है | आखिर जनता की आवश्यकताओं और सुविधाओं की पूर्ति करना सरकार की जिम्मेदारी ही तो है | सड़कों के निर्माण और शहर की सफाई के नाम पर आम जनता से ही तो टैक्स वसूले जाते हैं  | सरकार हर साल इस काम के लिए मोटे बजट की घोषणएं तो कर देती है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक महकमों को अपनी जेब भरने से फुरसत मिले तब तो इन्हें अपना काम याद आये |
खैर, यहां मेरा उद्देश्य सरकारी तंत्र पर दोषारोपण करना नहीं है |  क्योंकि जब तक हम सिक्के के दूसरे पहलू की तरफ ध्यान नहीं देंगे, हम यूं ही लाचारी के जाल में उलझे रहेंगे  |
जरा सोचिये कि अपने शहर की सड़कों पर फैली गंदगी के लिए सिर्फ और सिर्फ सरकार को ही दोषी ठहराना क्या उचित है? क्या इस शहर के नागरिक होने के नाते हमारी अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती ?
अब एक मिनट के लिए इमानदारी से सोंचकर देखिये, कि आपने इस दिशा में क्या किया है? और क्या करना चाहिये ?
पटना नगर निगम के हालिया आंकड़ों के अनुसार केवल पटना शहर से हर रोज लगभग 1000 टन गंदगी उत्पन्न होती है | हो भी क्यों ना... पिछले 10 सालों में पटना के आवासीय क्षेत्र में तीन गुणा बढ़ोतरी हुई है, जबकि इस शहर की आबादी चार गुणा बढ़ी है | वहीं इसकी तुलना में पटना नगर निगम की श्रम- शक्ति में गिरावट आई है | शायद आपको जानकर आश्चर्य हो कि सड़क पर जितनी गंदगी फैली होती है उसमें से 35- 40 % हमारी गलतियों के कारण है |
सड़क पर चलते वक्त (पैदल हो या किसी सवारी पर) हमारे पास जो भी बेकार चीज पड़ी होती है उसे बिना इधर – उधर देखे बेपरवाह कहीं भी फेंकते चले जाते हैं | कचरा सही जगह पर फेकने के लिए दस कदम चलने की जहमत कोई उठाना नहीं चाहता | सड़क पर कहीं भी थूकते चले जाते है चाहे उस जगह पर ऐसा करना प्रतिबंधित ही क्यों न हो |
अब एक अहम सवाल पूछना चाहूंगी, क्या हम अपने घरों में भी ऐसा ही करते हैं ? शायद कुछ लोग कहें कि घर तो हमारा अपना है, और उसकी सफाई की जिम्मेदारी हमारी है | तो जनाब.. क्या वो सड़क आपकी नहीं है ? यह तो बस हमारी सोच का फेर है | अगर कभी किसी घर के नीचे से गुजरते वक्त आपके ऊपर गंदे पानी या कूड़े की बरसात हो जाये, तो भी शायद यह कोई बड़ी बात नहीं होगी | क्योंकि हमारी सोच ही ऐसी है | अपने घर के सामने सफाई करके कूड़े को बीच सड़क या बगल वाले घर के पास जमा कर देते हैं | सोचिये, अगर कोई हमारे साथ ऐसा करे तो कैसा लगेगा ? सरकार ने तो फिर भी जगह- जगह शुलभ शौचालय की व्यवस्था कर दी है | लेकिन कितने लोग इसका उपयोग करते हैं ?
हलांकि पटना नगर निगम बहुत जल्द ही पटनावासियों की इस हरकत पर लगाम लगाने के लिये 1000 रूपये जुर्माने का प्रावधान करने जा रही है | बड़ा ही अजीब लगता है ये सोचकर कि हम अपनी छोटी से छोटी गलतियां भी तब तक नहीं सुधारते जब तक हम पर जुर्माने या किसी तरह के दण्ड की तलवार नहीं लटकाई जाती |
अपनी इस सोच को बदलने के लिये हम और कितना वक्त लेंगे ? जितनी जल्दी ऐसा हो, हमारे और हमारे शहर के लिये उतना ही अच्छा होगा | क्योंकि सकारात्मक सोच ही पूरे बिहार की काया पलट सकती है | इसके सरकार और प्रशासन को भी इमानदारी से आगे आना होगा | और अगर वह ऐसा करने में विफल होती है, तो हर आम आदमी को अपना अधिकार और फर्ज समझकर सरकार और प्रशासन को समय-समय पर उनका काम याद दिलाना होगा |
साथ ही शहर के हर नागरिक को इस गंभीर समस्या के समाधन में अपना योगदान देना होगा | ये हमारा कर्तव्य है  | ऐसा करके हम अपनी ही तो मदद करेंगे | आखिर उन सड़कों पर हमें भी तो चलना है |  गंदगी से फैलनेवाली बीमारियां हमें भी तो बीमार बनायेंगी | जब तक शहर के वातावरण में दूषित हवा और बदबू फैली होगी शुद्ध वातावरण की अपेक्षा करना बेइमानी होगी |
 

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