Thursday, October 18, 2012

बदलते दौर में फाइनेंन्स्ड दुर्गा पूजा...

सबसे पहले मैं उन पाठकों को इस महान पर्व कि बधाई देना चाह्ता हूँ जो इसे पढ़ रहे हैं...और उन्हे भी जो इसे नही पढ़ पा रहे है...इस पुजा के साथ बड़ी यादें जुडी हैं...हम बचपन में इस बात का इंतज़ार करते थे कि कब ये पर्व आये और हम नये-नये कपड़े खरीदें और खुब घुमे...हालांकि अभी भी जब मौका मिलता है तो घुम ही लेता हूं...पर उतना नही घुम पता जितना घुमा करता था।

मुझे दुर्गापुजा से जुड़ी हर बातें बहुत पसन्द है...चाहे वो चाट हो जो हर पांच कदम मे ठेले पर सवार रहता है...आज कल उसने अपने ठीक बाद चौमिन को जगह दे रखी है...यहां पर लोगों कि भीड़ को देख के लगता है की वाकई इस देश कि जनसंख्या एक अरब से ज़्यादा है....इसके आगे बैलून फ़ोड़ने का खेल लगा होता है...जिस पर पहले एक रुपये में पांच बार मौका मिलता था...आज कल वो दो हो गया है।

जब मैने उससे पूछा कि पहले तो पांच मिला करता था..
तब उसने मुझसे कहा सर महंगाई का ज़माना है...
मैं चुप हो गया और मेरे अन्दर खबरिया चैनलों की तस्वीर चल पडी जिसमें देश कि राजनीतिक पार्टियाँ एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं कि महंगाई का ज़िम्मेवार हम नहीं दूसरी पार्टी है...
खैर मैने उस समय ज़्यादा नही सोचा नहीं तो दुर्गापुजा घुमने का मज़ा खराब हो जाता...
मैने जब निशाना लगाया तो मैने बीस मे से बारह बार बैलून फ़ोड़ दिये...
इसका कारण बचपन की मेरी प्रैक्टिस थी...बाकि सारे लोग केवल पांच–छह पर सिमट जा रहे थे...
मैनें अपना रौब ज़माने के लिये लोगों से बोला कि बस छेः...
तो एक ने मुझपे पलटबार करते हुए बोला कि छोड़िये भाई साहब इसने सेटिंग कर रखी हैं...
बनदुकेबे टेढ़ा है...त हम का करें....
तब मैनें सोचा कि इस देश में सेटिंग किस स्तर से शुरू हो जाती है ...
खैर मैं बड़ा पोजिटिव आदमी हूं...मैंने बोला भाई साहब कभी-कभी सेटिंग अच्छी भी होती है...
इसी बहाने हमारे निशानेबाज़ एक-दो मेडेल तो ले आते हैं...
बाकि खेलों का तो हाल छोड ही दीजिये...
उसने कहा मैं तो क्रिकेट का॑ फ़ैन हू...
मैने कहा यही आशा थी...बाकी और कोई खेल हमारे देश में होता है...क्या?


जब मैं थोड़ा आगे बढा तो देखा कि एक बड़े बैनर पर लिखा था...विशाल मेगा मार्ट के तरफ़ से आपको दुर्गा पुजा कि ढ़ेर सारी बधाई...मैने कहा चलो कम से कम बधाई तो इसने दी है...आज कल तो अपने लोग बधाई भी नही देते...

फिर मुझे लगा कि कहीं ये सारी कंपनियां बहुत खुश तो नहीं...क्योंकि ये जानती हैं कि छोटे दुकानदारों का ये खुशी का अंतिम साल है...अरे भाई ....FDI को मंजूरी जो मिल चुकी है...
पंडाल में इसी नारे के साथ अन्दर आया कि...दुर्गा पुजा समिति आपका हार्दिक अभिनन्दन करता है, करता था और करता रहेगा.. मैंने सोचा चलो कुछ तो पुरानी चीजें बची है...

मैंने जब पंडाल के अंदर का नजारा देखा तो दंग रह गया...ये पंडाल कम विज्ञापन केंद्र ज्यादा था...
वायें तरफ लिखा था सुधा दूध रोज पीयें..
ठीक उसके सामने रणवीर कपूर पेप्सी पी रहा था....


जब मैंने मूर्तियां देखी और दंग रह गया गणेश भगवान के नीचे लिखा था.... एक्सिस बैंक के सौजन्य से.....
तब मैंने आयोजको से पूछा कि ये मामला क्या है...उसने बड़ी विनम्रता से कहा कि इस बार गणेशजी की मूर्ति का फिनांस एक्सिस बैंक ने किया है..


मैं अवाक् सा रह गया और पंडाल में लगी एक अच्छी सी कुर्सी पर जा बैठा और मां दुर्गा की मूर्ति पर अपना ध्यान लगाया और थोड़ी देर इस भागम-भाग दुनिया को भुलाकर कुछ अच्छी बातें सोचने की कोशिश की ..
जो नकामयाब रही...क्योंकि नये-नये फिल्मों के गाने बैकग्राउण्ड से लगातार चल रहे थे..............
आप सभी को एक बार फिर से दुर्गा पुजा की बधाई!

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