जैसे हम जानते हैं कि
विभिन्न प्रकार के भोजन जोकि हमारी सभ्यता संस्कृति से हमें अवगत कराती है| साथ ही साथ हमारे पूर्वजों से मिली एक विरासत के
रूप में हमारी पहचान भी कराती है| क्योंकि जैसे हर देश की
हर राज्य की भाषा अनेक है, उसी प्रकार खानपान भी हर राज्य का हर देश का अलग-अलग होता है और ये
अभिन्न अंग होता है हर देश का। लेकिन इसके लिए जरूरी नहीं है कि हम जिस देश में
रहते हैं उसी की वेश-भूषा या खान पान को अपनायें क्योंकि इससे तो हम अपने संस्कृति
से जुड़े रह सकते हैं लेकिन दूसरे देशों की सभ्यता संस्कृति से हम वंचित रह
जायेंगे| इस ब्लॉग के माध्यम से मैं संस्कृति को खान-पान से जोड़
रही हूँ, जिससे कि आजकल के लोग बहुत ही मानते हैं और इसे अपनाने में भी उन्हें कोई
संकोच नही हो रहा है|Sunday, August 31, 2014
सभ्यता संस्कृति से रु-बरु कराता खानपान
जैसे हम जानते हैं कि
विभिन्न प्रकार के भोजन जोकि हमारी सभ्यता संस्कृति से हमें अवगत कराती है| साथ ही साथ हमारे पूर्वजों से मिली एक विरासत के
रूप में हमारी पहचान भी कराती है| क्योंकि जैसे हर देश की
हर राज्य की भाषा अनेक है, उसी प्रकार खानपान भी हर राज्य का हर देश का अलग-अलग होता है और ये
अभिन्न अंग होता है हर देश का। लेकिन इसके लिए जरूरी नहीं है कि हम जिस देश में
रहते हैं उसी की वेश-भूषा या खान पान को अपनायें क्योंकि इससे तो हम अपने संस्कृति
से जुड़े रह सकते हैं लेकिन दूसरे देशों की सभ्यता संस्कृति से हम वंचित रह
जायेंगे| इस ब्लॉग के माध्यम से मैं संस्कृति को खान-पान से जोड़
रही हूँ, जिससे कि आजकल के लोग बहुत ही मानते हैं और इसे अपनाने में भी उन्हें कोई
संकोच नही हो रहा है|Security threat: Internal or External
India
is the biggest democratic country in the world. It commands a great respect
around the globe due to its socialist, democratic, and secular values. However
India is still far away from becoming a super power. For becoming superpower
nation like America, a country should be economically strong as well there are
many other aspects also which makes a country superpower. Internal security of
any country is of paramount importance, if it wishes to grow smoothly. Issues
of internal security such as insurgency in north east region, naxalism,
communal violence, regional violence have become barrier to the utter
development of the country since independence
Friday, August 29, 2014
रैगिंग- एक दरिंदगी
रैगिंग पर लगाम लगाने के लिए सरकार और कानून पूरी तरह से सख्त है फिर भी रैगिंग थमने का नाम नही लेती, लिहाजा इसका शिकार मासूम और निर्दोष छात्र होते हैं।
रैगिंग की शुरुआत कब हुई या कैसे हुई इसका जिक्र इतिहास के पन्नों मे भी नहीं है। देखा जाए तो रैगिंग सीनियर छात्रों द्वारा अपने जूनियर छात्रों से या संस्थान परिसर में आये नये छात्रों से परिचय लेने का तरीका है। रैगिंग सीनियर छात्र इसलिए लेते हैं ताकि उनके जूनियर छात्र उनकी इज्जत करें साथ ही शिष्टाचार के माहौल मे रहें। पर क्या वास्तव मे ऐसा होता है? इस प्रश्न का एक ही जवाब है– “नहीं”।
रैगिंग की शुरुआत कब हुई या कैसे हुई इसका जिक्र इतिहास के पन्नों मे भी नहीं है। देखा जाए तो रैगिंग सीनियर छात्रों द्वारा अपने जूनियर छात्रों से या संस्थान परिसर में आये नये छात्रों से परिचय लेने का तरीका है। रैगिंग सीनियर छात्र इसलिए लेते हैं ताकि उनके जूनियर छात्र उनकी इज्जत करें साथ ही शिष्टाचार के माहौल मे रहें। पर क्या वास्तव मे ऐसा होता है? इस प्रश्न का एक ही जवाब है– “नहीं”।
Thursday, August 28, 2014
महागठबंधन की आड़ में जातीय राजनीति का खेल
बिहार में दस विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में महागठबंधन ने बाजी मार ली। हाल ही में संपन्न मतदान की हुई मतगणना में महागठबंधन को छह सीटें मिली जबकि भाजपा ने अकेले दम पर चार सीटें अपने नाम की। यह बात देखने लायक रही कि जिस अंतर से भाजपा केन्द्र में आई तभी से बिहार की राजनीति में उथल पुथल की स्थिति बनी हुई थी। लालू ने जहां इस मौके को अपने राजनीतिक पुनर्जीवन के रूप में उपयोग करना जहां वहीं नीतीश भी अपनी खोई साख को पाने के लिए उसी जातीय राजनीति के दुष्चक्र में फंसने को तैयार हो गए।कौन लिखे गरीबों का इतिहास

हमारे समाज में एक ऐसा वर्ग है जिसके बारे में हम सोचते तो हैं और शायद उस वर्ग से सहानुभूति भी रखते है, पर उनके लिए कोई कुछ करता नहीं। बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था की “गरीबों का इतिहास कोई नहीं लिखता”।यह कथन आपको सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर क्या है गरीबों का इतिहास? इतिहास के नाम पर अगर कुछ है तो सिर्फ आंकड़े और कुछ नहीं। कहते हैं इतिहास भावशून्य होता है, वह किसी की तरफदारी नहीं करता, लेकिन अगर हम इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो तथ्य कुछ और ही बताते हैं।
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