Thursday, October 18, 2012

साहेब तेल पीने लगे हैं...

तेल पीने की घटना पर लिखने के लिए मेरा मन बहुत दिनों से व्याकुल था. वजह थी साहब होने के नये फायदों से सबको अवगत कराना. और करायें भी क्यों न, हमसब का जो ख्वाब होता है साहब बनने का. आज समय मिला सोचा लिखकर बता ही दूँ, न जाने कभी काम ही आ जाये.
 ये बात कुछ दिन पहले की है. उस रोज मैं अपने गाड़ी की टंकी में पेट्रोल भरवाने पेट्रोल पंप पर गया हुआ था. पेट्रोल भराकर मैं खरीद की रसीद ले रहा था. इतने में एक चमचमाती चार चक्के की गाड़ी आकर रूकती है. ड्राईवर साहेब गेट खोलकर पेट्रोल पंप कर्मी को टंकी को फुल करने का हुक्म देते हैं. बेचारा कर्मी तुरंत चंद समय का मालिक का कहा मान कर, तेल भराई शुरू कर देता है. अगले कुछ ही मिनटों में टंकी फुल हो जाती है. जब पैसा देने की बारी आती है, तो ड्राईवर साहब अपने बगले झांकतें हैं. जेब से पैसा नहीं निकलता. अंत में गाड़ी के पिछली सीट पर बैठे आदमी से पैसा लेकर, कर्मी को दे देते हैं. पीछे बैठे आदमी चाल ढ़ाल से साहब जैसे दिखते हैं. साहब को कुछ याद आता है, वे ड्राईवर को रसीद लेने की हिदायत दे देते हैं. बेचारा ड्राईवर, साहब की बात मानकर रसीद लेने के लिए संघर्ष करना शुरू कर देता है. पंप कर्मी आता है, तेल की मात्रा पूछकर रसीद के फिल इन द ब्लैंक्स कॉलम को भरना शुरू कर देता है. जब रसीद पर छपे स्थान पर गाड़ी नंबर लिखने की बारी आती है. तो वह गाड़ी की नंबर प्लेट देखने चला जाता है. इतने में गाड़ी के पीछे बैठे साहब का ध्यान टूटता है. गाड़ी से बाहर निकलकर पेट्रोल पंप कर्मी से रसीद पर गाड़ी नंबर का स्थान खाली छोड़ देने के लिए कहते हैं. पेट्रोल पंप कर्मी बिना कोई बात कहे साहब के हाथ में ही बिल दे देता है. साहब मुँह से पान मसाला थूकते हुए, चमनियां मुस्कान के साथ अपनी सीट पर बैठ जाते हैं. ऊधर ड्राइवर मालिक को बैठता देख अपनी सीट पर बैठकर गाड़ी आगे बढ़ा देता है. गाड़ी के जाते ही, वह कर्मी साथ काम कर रहे अपने मित्र से कहता है, साहब तेल पीकर चले गये. अब हम भी सोंचें वो तेल पीने का क्या मतलब है! अगर आपके समझ में आ गया हो, तो फिडबैक देकर मुझे जरूर बताईये.

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