फ्रांस का नाम जेहन में आते ही जो पहली बात
दिमाग में कौंधती है वह है फ्रांसीसी क्रांति। वह क्रांति जिसने दुनिया को लोकतंत्र
के मूलभूत स्तंभों से अवगत कराया और जिसके आधार पर आधुनिक राष्ट्रों का निर्माण
हुआ। आज भी फ्रांस इसका दंभ भरता है जहां हर सरकारी भवनों में प्रमुखता से
स्वतंत्रता, समानता और भाईचार मोटे मोटे अक्षरों में उकेरा हुआ है। लेकिन पिछले
कुछ समय से फ्रांसीसी समाज जैसे सड़न के दौर से गुजर रहा है, जहां नस्ल और धर्म के
आधार पर समाज बंटा हुआ दिख रहा है, जिसमें ताजा मामला है बुर्कीनी विवाद।Wednesday, September 7, 2016
स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा या... बुर्कीनी!
फ्रांस का नाम जेहन में आते ही जो पहली बात
दिमाग में कौंधती है वह है फ्रांसीसी क्रांति। वह क्रांति जिसने दुनिया को लोकतंत्र
के मूलभूत स्तंभों से अवगत कराया और जिसके आधार पर आधुनिक राष्ट्रों का निर्माण
हुआ। आज भी फ्रांस इसका दंभ भरता है जहां हर सरकारी भवनों में प्रमुखता से
स्वतंत्रता, समानता और भाईचार मोटे मोटे अक्षरों में उकेरा हुआ है। लेकिन पिछले
कुछ समय से फ्रांसीसी समाज जैसे सड़न के दौर से गुजर रहा है, जहां नस्ल और धर्म के
आधार पर समाज बंटा हुआ दिख रहा है, जिसमें ताजा मामला है बुर्कीनी विवाद।
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