Wednesday, October 17, 2012

कैंपस मेरे विचारों की जन्मभूमि

बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, पटना
कैंपस युवा पीढ़ी की धड़कन है। इन कैंपस में मानव समाज का भविष्य अपने बहुमुल्य पल व्यतीत करता है। इन अनमोल पलों में वह शिक्षा, खेल और मनोरंजन का एक साथ आनंद लेता है। लोकतांत्रिक भारत के राज्य बिहार के जिला नालंदा से संसार को कैंपस की आधारशिला मिलती है। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर इसकी पुष्टि करते हैं। इन कैंपस में युवा शक्ति अपने दोस्तों के साथ हंसी-मजाक करती है। वहीं विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इसलिए कैंपस में राजनीतिक गतिविधियां, समाजिक परिवर्तन और आर्थिक विकास के मुद्दों को ऊर्जा और नई मंजिल मिलती है। जहां फैशन की हर नई हवा पहले बहती है और समाज में रचती चली जाती है। जहां सामाजिक कुरीतियों के ताने-बाने टूटते नजर आते हैं। जो सामाजिक परिवर्तन की आहट देते हैं।

इन सभी गुणों के कारण कैंपस मानवीय समाज की एक ऐसी संस्था है, जहां मानवीय समाज के नींव कहे जाने वाले छात्रों को शिक्षित और विचारवान बनाया जाता है, साथ ही इन छात्रों को मानवीय मूल्य की सीख भी दी जाती है। ये छात्र अपने  विषय के विद्वान होते हैं वही समाज में उपस्थित समस्या के जानकार होते हैं। इनके अन्दर वो क्षमता होती है कि वह इन समस्या का निदान कर सकते हैं। देश और समाज, इन छात्रों से अपने उज्ज्वल भविष्य की अपेक्षा रखता है।

भारतीय समाज में पायी जाने वाली विविधिता में एकता, इन कैंपस में भी पायी जाती है। यहां छात्र और छात्राएं अपनी पृष्ठभूमि से आते हैं और दूसरे छात्र-छात्राओं से घुलमिल जाते हैं, एक-दूसरे के संस्कार और रीतियों के जानकार हो जाते हैं। ये परिवर्तन उनमें कब आया उन्हें पता भी नहीं चलता है। कैंपस संस्कृति के वाहक होते हैं। वहीं नई संस्कृति भी बनाते हैं।

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