Sunday, November 10, 2013

प्रकृति का प्रकोप या सत्ताधारियो का खेल


सत्ताधारियो के खेल में बेवश भोले ऩाथ 
भगवान भोले नाथ बड़े भोले है, लेकिन जब उनका गुस्सा फुटता है तो सर्वनाश होता है. देवभूमि उतराखंड में आई भयंकर प्राकृतिक आपदा को इस गुस्से के प्रतीक रुप में देखने की जरुरत है. यह भू-क्षेत्र प्राकृतिक संपदा से भरा पड़ा है. लेकिन जिस प्रकार उत्तराखंड विकास की र्शीष सूची में था, इस आपदा ने साबित कर दिया उत्तराखंड की विकास भीतर से कितना खोखला था. बारिश, बाढ़, भूस्खलन, बर्फ की चट्टानों का टूटना और बादलो का फटना, यह संयोग नही हैं. बल्कि विकास के बहाने पर्यावरण विनाश की जो भूमिका रची गई. इस तबाही से साफ हो गया है कि आजादी के 66 साल बाद भी हमारा न तो प्राकृतिक आपदा प्रबंधन प्राधिकरण आपदा से निपटने में सक्षम है न ही मौसम विभाग आपदा की सटीक भविष्यवाणी करने में समर्थ है.

कमजोर और नाजुक रिश्ते भारत और पाकिस्तान के


समुद्र के उतर में तथा हिमालय के दक्षिण में स्थित यह विशाल भौगोलिक क्षेत्र भारतवर्ष के नाम से जाना जाता है. ये बात चरितार्थ है कि समय की ताकत के आगे किसी का वस नहीं चलता, भारत का सौंदर्य, समृद्धि, और उदारता को लूटने के लिए विश्वभर के कई देशों ने अपना गुलाम बनाने की कोशिश की. जैसे ही इंगलैंड का साया भारत पर पड़ी, उन्होंने भारत की आत्मा को झकझोर कर रख दिया. उन्होंने ही अपने स्वार्थ के लिए भारत में धर्म विरोधी भावनाओं को भड़काया और धर्म के ऩाम पर 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान को नया राष्ट्र बना दिया.

ये कैसी अर्थव्यवस्था है भारत और पाकिस्तान की


भारत क्रय-शक्ति-समता P.P.P(Purchasing Power Parity) के आधार पर विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है तथा विश्वभर में तेज गति से उभर रहे राष्ट्रों में से एक हैं, विश्वभर के विकसित देशों के दि्वपक्षीय एवं बहुपक्षीय व्यापार सम्बंध भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं. भारत और अमेरीका सम्बंध, भारत-यूरोपीय संघ सम्बंध, भारत-जापान, दक्षिण कोरिया के मध्य (EPA- Comprehensive Economic Partnership Agreement) समझौता.