Wednesday, December 21, 2016

बुजुर्गों की हो रही त्रासदी: जिम्मेवार कौन

उंगली थाम के मेरी तुझे, मैं चलना सिखलाऊं |
तू बांह पकड़ना मेरीजब मैं बूढ़ा हो जाऊं ||”
      

 एक कवि की ये चंद पंक्तियॉ मॉ-बाप की उम्मीद बयॉ करती हुई दिख रही है| पर क्या आज ये पंक्तियां सार्थक होती प्रतीत होती है| एक वृद्ध आश्रम से निकलने के बाद वहां कि चंद बातें मेरे दिमाग को झकझोरने लगी. जिसे मैंने एक लेख का रुप दिया है|
                                                   भारत में तेजी से आयी पश्चम संस्कृति ने यहॉ के सामाजिक जीवन को अस्त व्यस्त किया है भारतीय समाज में बुजुर्गों की खास इज्जत और सम्मान हैलेकिन वत्तर्मान परिस्थिति में बुजुर्गो की देखभाल, सुरक्षा और सम्मान एक समस्या का रुप लेती जा रही है|

Monday, December 19, 2016

On Connoisseur's Mind: The Taste Revolution: A Look Back

On Connoisseur's Mind: The Taste Revolution: A Look Back: Bihar, a state laggard at industries has been one of the few exceptionally successful safe markets of hospitality sector in country, court...

On Connoisseur's Mind: BIHARI CUISINE: A HIT AMONG CONNOISSEURS

On Connoisseur's Mind: BIHARI CUISINE: A HIT AMONG CONNOISSEURS: Generally sweets remind us of the city of joy, Kolkata unaware of the fact that sweet delicacies of Bihar still top the connoisseurs’ list...

On Connoisseur's Mind: Gluttony Addas of Patna

On Connoisseur's Mind: Gluttony Addas of Patna: Patna has its own unique tradition of food habits. The feeding habits of Patnaites have an impression of its demographical position and cul...

Sunday, December 18, 2016

बिहार की विश्वविद्यालय प्रणाली

बिहार के विभिन्न विश्वविद्यलयों में निरंतर शिक्षा व्यवस्था पे आंदोलन आम बात हैं। बिहार में शिक्षा का निरंतर गिरता हुआ स्तर एवम् आय दिनों महत्वपूर्ण विश्वविद्यालयों में हो रहे कर्मचारियों की हड़ताल विचारशील व्यक्तियों के लिए गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है लेकिन विडम्बना है की जिस चिंता के साथ समस्या पर विचार विमर्श हुआ करता है उसका अल्पांश भी हम समस्या के निराकरण के प्रयत्न में परिलक्षित नही पाते।आज हमारे प्रदेश के छात्र उच्च शिक्षा के लिए पलायन नही रोक पाते। प्रदेश में प्राथमिक स्तर से ही पठन पाठन व्य्वस्था फिसड्डी है।आज वर्तमान सन्दर्भ में बात करें तो इतने बड़े और शिक्षाविदों के प्रदेश में विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर ही छात्र कल्याण से बाहर हैं। परीक्षा की तिथि रिजल्ट के इन्तजार में ही छात्र अपना साल बर्बाद पाते हैं। देश के सम्माननीय विश्वविद्यालयों में पढ़ने का सपना मात्र सपना ही रह जाता है। कर्मचारियों के संदर्भ में बात करें तो मुलभुत आवश्कताओं के बिना ये भी हड़ताल करने को मजबूर होते हैं और इन समस्त कर्मों का फल विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है।अन्य प्रदेशों की तरह अगर अपने प्रदेश के विश्वविद्यालय को भी अगर देश के हित में भागीदारी सुनिश्चित कराना है तो सरकार को छात्रों को आंदोलन और कर्मचारियों को हड़ताल करने का मौका नही देना चाहिए। ये सब तब ही संभव है जब समस्त स्तर के शैक्षणिक व्यवस्था को सुधार कर पटरी पे लाया जाए एवम् कर्मचारियों को उनके हक़ की सुख सुविधाएँ प्रदान की जाए वरना अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नही जब यंहा की शिक्षा मात्र नाम की ही रह जायगी।

Saturday, December 17, 2016

Why it is compulsory for Muslim women to wear hijab/abaya or to cover themselves?

It is not compulsory for Muslim women to wear a specific piece of garment to cover themselves .Quran is very explicit in its direction for female modesty and maintain grace. Hijab /abaya are convenience and the conformity of these garments with Quarnic orders.

साबित तो कर दिया हमने, पर आप कब मानोगे ?

मीठी सी किलकारी, वो नन्हे नन्हे हाथवो खूबसूरत आँखें जो न जाने इस
दुनिया मैं  आते आते  बहुत कुछ कहना चाहती हो ।  जिससे  इस  दुनिया में
लाने के लिए उसकी माँ ने न जाने कितनी  यातनायें कितनी पीड़ा  सही  थी ।
शायद  उसने अपने माँ के पेट में ही
इस जालिम दुनिया की रीती रिवाज को समझ
लिया था  । जिस दुनिया में  उसकी माँ को इतने कष्ट  झेलने पड़े इतनी
यातनाएं साहनी पड़ी । उसने ठान  लिया मैं इस दुनिया मैं आउंगी जरूर आउंगी
और  लोंगों को यह साबित करुँगी की इस दनिया में  एक लड़की को जन्म देना
सौ लड़को को  जनम देने के बराबर है ।
देश के आज़ाद हुइ आज सतर वर्ष हो चुके पर इन सतर वर्षों
में देश में बहुत कुछ बदला नई नई तकनीके आई लेकिन अभी भी लड़कियों को लेकर
लोगों के विचार साफ नहीं हुए  हैं आज भी बहुत जगह ऐसी हैं जंहा लड़कियों
को बोझ के आलावा ज्यादा  कुछ नहीं समझा जाता है।  मेरी इस पंक्ति से यह
तो समझ ही गए होंगे की मैं किस बारे में बात करने वाली हूँ  जी हाँ  -
कन्या  भ्रूण  हत्या। हमारे देश में कन्या भूर्ण हत्या एक अपराध  माना
जाता है  पर फिर भी यह अभी भी बहुत बारे पैमाने पर हो रहा ।
प्राचीन समय से ही हमारे देश में लड़कियों को एक
अभिशाप माना  जाता है  |  1990 में चिकित्सा के क्षेत्र में हुई उनत्ती
के बाद ही भारत में भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिला  भारतीय समाज में लड़कियों
को आर्थिक और सामाजिक रूप से एक बोझ के समान माना जाता है इसलिए  शायद
उनलोगों की नज़र में  लोग यह लड़कियों को दुनिया में लाने से पहले ही मार
देना ज्यादा  बेहतर होगा। समाज में ऐसे तबके के भी लोग हैं जिनके नज़र में
लडकिया उपभोगी होती है और लड़के उत्पादक ।



हो सकता है कुछ लोग मरे इस ब्लॉग को पढ़ कर मेरी
बातों से संतुष्ट  न हो उन्हें यह लगता होगा की मैं अभी  भी बहुत पुरानी
बातों का जिक्र ले कर बैठ गई हूँ । उनका यह मनना होगा की अगर ऐसा कुछ
होता तो अख़बार या समाचार में जरूर आता मगर मेरे दोस्त जरुरी नहीं  की जो
अख़बार या समाचार में आये वही खबर हो । भारत में ऐसे अभी भी कई गांव है
जंहा बच्चीयों  को सिर्फ इसलिए  मार  दिया जाता है की वह एक लड़की है ।
अगर मैं आकड़ा का जिक्र करे तो महिला लिंग अनुपात पुरुषों की तुलना में
बड़े स्तर पर गिरा है । 8 पुरुषों पर 1 महिला  है । अगले पाँच वर्षों में
अगर हम पूरी तरह से भी कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगा दें तब भी इसकी
भरपाई  कर पाना  आसान नहीं होगा। इस देश में ऐसे भी कई परिवार जंहा की
महिलाये अपनी ही बेटी को बचने के लिए एक आवाज़ तक नहीं उठा सकती उनकी
आवाज़ को भी उनकी बेटी के साथ दबा  दिया  जाता है  ।
शायद हम अभी भी उन आवाज़ों से बहुत दूर है जो  चीख चीख कर
कहती है -.....  माँ मुझे बचा लो  ..... मुझे  मत मारो  .....   ।
जरुरत है हमे एक ऐसे शसख्त कानून की जंहा कन्या भूर्ण हत्या
जैसे गंभीर अपराध को रुक जा सके । हाल के ही दिनों में केंद्रीय महिला
एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गाँधी ने भ्रूण हत्या पर अपना सुझाव  दिया था ।
उन्होंने लिंग परीक्षण पाबन्दी ख़तम करने की बात कही ।
मेरी नज़र में यह सहरानीय है । ये भी सोचने वाली बात है
की कब तक हम अल्ट्रासॉउन्ड वालो को जिमेदार ठहरा कर  गिरफ्तार करते
रहेंगे । अगर  हम जरा ठन्डे दिमाग से सोचे तो सारा दोष अल्ट्रासॉउन्ड
वालो का नहीं होती जो लिंग जाँच कर  बताते है बेटी है या बेटा  । सही
मायने में दोष उनका  होता है जो यह जानने के बाद की गर्भ में बेटा नहीं
बेटी है और उस बेटी को मार देते है जरुरत है ऐसे लोगों के विचार धार को
बदलने की ।
उन लोगों को यह समझने की जरुरत बेटी बोझ नहीं
बल्कि घर ही नहीं देश कि भी लक्ष्मी होती है और ये कथन कंही न कंही सत्य
है तभी तो हाल में ब्राज़ील में हुए रियो ओलंपिक में हमारे देश को जो मेडल
मिले वो मेडल देश को देश की बेटियों ने ही दिलवाया फिर  हम बेटियों को
बोझ कैसे मन सकते ... ? जरुरत है तो सिर्फ मानसिकता बदलने की फिर  इस देश
को बेटियां बहुत आगे तक ले कर जाएँगी ।


Rural Tourism offers you a peace of mind

Rural Tourism offers you a peace of mind

Are you tired of dealing with your office politics, competitive circles and demanding city life? If yes, just head in the lap of nature and break this havoc. Let’s take a step towards our tribal areas which helps us learn the basics of staying healthy and happy.
                                                
We are fortunate enough that we are living in a country of villages. India is popular for its peace and harmony mantra where you can easily breathe in fresh air. Now –a-days, most of the independent tourists are ditching the luxury of five stars resorts and stepping towards beautiful Indian villages and tribal areas to analyse and experience how the rural folks live the simple, happy and peaceful life.
                                              

On countryside tour, you may get opportunity to stay with the local people, interact with them and also able to learn about the fruitfulness of hard manual labour like farming, doing pottery, making bamboo baskets, cooking on firewood and many more lively activities, which may become the most incredible and memorable experience of your life.
Actually coming close to nature, breathing fresh air and being around greenery brings a real sense of peace and relaxation within us. Eating locally grown, home cooked and sharing a meal with family is intrinsically amazing feeling. All these things put us in touch with our roots and de-stress us. It also makes us realize that to be genuinely happy, only the basics are food, water, clothing and shelter.
                                                 

When you visit these areas then you will come to realize that life is more than just climbing the ladder of success, living in bungalow, staying in five star resorts, buying Audi, paying EMIs, maintaining bank balance and sipping drinks in a club.

The Magician

There was a time when a magician born in India created the biggest sensation in the world. He was also a soldier of Indian Army. He was non-other than Major Dhyan Chand Singh.