जी हां आपको सुनकर अश्चर्य तो हो रहा होगा लेकिन यह सत्य है। विकास कोर्इ राजनीतिक या आर्थिक नहीं बलिक एक जिराफ है, जिसकी मौत इलाज की कमी के कारण पटना के चिडि़याघर में हो गर्इ। विकास को 2006 में पटना के जू में लाया गया था। विकास अमेरिका के संत डियागो जू में आठ जुलार्इ 2005 को जन्मा था। जू प्रशासन उसकी मौत का कारण
टीबी को बता रहा है। पर सवाल यह है कि क्या इतनी साधारण बीमारी का र्इलाज करने में जू प्रशासन सक्षम नही है\ या इसका कारण उनकी लापरवाही तो नहीं है\
टीबी को बता रहा है। पर सवाल यह है कि क्या इतनी साधारण बीमारी का र्इलाज करने में जू प्रशासन सक्षम नही है\ या इसका कारण उनकी लापरवाही तो नहीं है\
ऐसा नहीं है कि चिड़ियाघर में जानवरों की इस तरह की मौत पहली घटना है। जू प्रशासन को अब तक कर्इ झटके लग चुके हैं। अभी हाल ही में तीन बाघ शावक, एक सिंह शावक समेत दो शिशु जिराफ भी असामयिक मौत के शिकार हुए हैं। लेकिन अभी तक कोर्इ ठोस कदम नहीं उठाये गये जिससे जानवरों का सही समय पर इलाज किया जा सके।
इसे जू प्रशासन की मजबूरी कहें या लापरवाही दोनो ही सूरतों में हानि जानवरों की ही है। बहरहाल ये मासूम जानवर केवल दर्शकों के आकर्षण का केन्द्र ही नहीं वरन् इसकी प्रजाति लुप्त ना हो इसलिए भी यहां इन जानवरों को सुरक्षित केज में रखा जाता है। किन्तु क्या ये यहां भी सुरक्षित हैं।
मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक डी.के.शुक्ला के अनुसार जिराफ बाहर से स्वस्थ्य दिख रहा था। इसलिए किसी की नजर उसपर नहीं पड़ी। परन्तु वह इस बात का जवाब नहीं दे पाये कि प्रति 6 महीनें में सभी जानवरों की चिकित्सा जांच के नियम का पालन किया गया या नहीं। वह जवाब दें या नहीं परन्तु यह समझना बहुत मुश्किल नहीं है कि अगर इस नियम का पालन किया जाता तो टीबी जैसे साधारण बीमारी से जिराफ की मौत नहीं हुर्इ होती। क्या इतने बेगुनाह जानवरों को खो देने के बाद जू प्रशासन इससे कोर्इ सबक लेगा या ये बेजुबान जानवर ऐसे ही मरते रहेंगे।
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