हमारे देश में भारतीय रेल ने वृद्धों के किराये
की भाड़ा पर 40% की
छूट दी है। वृद्धों के सम्मान में सीनियर सीटीजन की बिशेष सुविधा मुहैया कराता है
यह 40% की
सुविधा कितना लाभदायक साबित हो पा रही है। इसका अनुभव रेल में यात्रा करने पर ही
प्राप्त होता है।
मैं लोकल ट्रेनों से अक्सर यात्रा करता रहता
हूं। मेरी यात्रा ज्यादा समय की नहीं रहती है। मैं हमेशा ट्रेनों के पटना से बाढ़ जाया
करता हूं जो एक घंटे से डेढ़ घंटे की होती है। ट्रेनों में बैठने के बाद मेरी आदत
होती है कि मैं अपने कानों में आईपॉड का हेडफोन लगा लेता हूं, लेकिन म्यूजिक नहीं सुनता
हूं और आसपास बैठे यात्रियों पर ध्यान रखता हूं यानि उनकी हरकतों पर बिशेष ध्यान
रखता हूं।
ऐसी ही एक घटना का चित्रण आपके सामने कर रहा
हूं। मैं पटना-झाझा ट्रेन में अपनी सीट पर कान में हेडफोन लगाकर बैठा हूं। मेरे
सामने के सीट पर एक सज्जन व्यक्ति अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ बैठे हुए हैं।
ट्रेन अगले स्टेशन पटना साहिब पर रूकती है ट्रेन के गेट पर यात्रियों के उतरने और
चढ़ने के कारण काफी धक्का-मुक्की होता है। इस धक्का-मुक्की करने के बाद एक वृद्ध
महिला अपने समानों को लेकर चढ़ती है जिसके कपड़े काफी मैले होते हैं, धीरे-धीरे
सीट के तरफ आती वह वृद्ध महिला सामने की सीट पर बैठने की कोशिश करती है लेकिन उस
सज्जन व्यक्ति की पत्नी वृद्ध महिला को बैठने नहीं देती हैं और इसके साथ कहती है
कि ‘बिना टिकट लिये यात्रा
कर रही है और सीट खोजती है, चलो जाओ यहां से।’ वह वृद्ध महिला उसी जगह पर नीचे अपने समान के साथ बैठ जाती है।
इसी बीच एक नौजावान
ट्रेन की उसी डब्बे में प्रवेश करता है और सीट के पास आकर महिला से कहा, थोड़ा
खिसकिये हम बैठेंगे ।
उस सज्जन की व्यक्ति की पत्नी कहती हैं कि यहां जगह नहीं है आप आगे देखिये। इतना
सुनते ही नौजवान ने पलट कर जबाव दिया-खिसकते हैं कि नहीं, कि आपको बताए। इतना
सुनते ही उनकी पत्नी सहम जाती हैं और नौजावन को बैठने दे देती हैं।
हमारे देश में रेल
मंत्रालय वृद्धजनों के लिये विशेष सुविधा देने की बात करता है, लेकिन सुविधा पर
पानी उस वक्त फिर जाता है जब वृद्धजन रेल में यात्रा करते हैं। ये अतुल्य भारत के
रेल यात्रा की एक सच्ची घटना है जहां वृद्धजनों को पांव रखने की जगह पर भी बैठने
का स्थान उपलब्ध नहीं होता है।
bahut hi sahi bat kahi aapne ganesh. ye aaj ke train yatrao ki sachhai hai..
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