"कब आएंगे अच्छे दिन"
सांईं इतना दीजिए जामे कुटूम समाय मैं भी भूखा न रहूं साधु न भूखा जाये। कबीर दास की इस वाणी को आज हम सिर्फ अपने जेहन में ही रखते हैं। अच्छे दिन का मतलब यह नहीं होता कि हम अमीर हो जाएं, हमारे पास बहुत पैसे आ जाएं नई सरकार को बने अभी सौ दिन भी नहीं हुए और लोग दिल्ली की तरफ आंख गड़ाए बैठे हैं। आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जोरों पर है। जनता खुल करबोलने मे भी घबरा रही है उन्हें लगता है कि नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के समय जो वादे किये थे वह पूरा नहीं होता दिख रहा है।
दरअसल लोग यह चाहते हैं कि कब उनके पास सुख सुविधा की सभी वस्तुएं आसानी से आ जाएं। चाय की दुकान पर लोग यह कहते हुये मिल जाते हैं कि कब आएंगे अच्छे दिन तो दूसरी पार्टी के लोगों को थोड़ा बुरा लगता है पर अंदर दुख उनको भी है बाहर से कहते हैं यार इतने दिन में क्य़ा कर लेंगे कुछ दिन और रूक जाते हैं फिर तो अपनी किस्मत है ही। कुछ लोग तथ्य के साथ अपनी बात को रखते हैं, रेल किराया बढ़ाया गया चीनी का दाम बढ़ा आलू भी प्याज से ज्यादा दामों पर बिक रहा है क्या ऐसे दिन को ही कहेंगे अच्छे दिन।
भारत जैसे देश में अचानक महंगाई को रोकना आसान काम नहीं है फिर भी सरकार अपने तरीके से काम को अंजाम देने में जुटी हुई है वर्तमान सरकार द्वारा यह घोषणा किया गया कि सभी घरों में कम से कम दो बैंक खाते होने चाहिए आज इसपर अमल भी हो रहा है क्या यह अच्छे दिन नहीं हैं? जहां हमें महीनों बैंक का चक्कर काटना पड़ता था वहीं आज कुछ घंटो में काम हो रहा है।
रेल का किराया बढ़ा इसमे हमारा भी फायदा हुआ जो रेल मंत्रालय घाटे में चलाया जा रहा था उस पर आंशिक रुप से ब्रेक लगेगा। 100 % एफडीआई की घोषणा की गयी इस पर भी कुछ लोगों में रोष दिखा उनका कहना है कि सरकार देश को बेचने पर तुली है। जबकि पिछली सरकार भी इस प्रकार के कार्य को करने के लिए आगे आई थी। सरकार द्वारा एक और पहल की गयी है कि हमारे घर तक रेल टिकट पहुंचाया जाएगा क्या यह अच्छे दिन नहीं हैं? अच्छे दिन का असर भारत के बजट में भी देखा गया जहां आम लोगों की रोजमर्रा की वस्तुओं का दाम कम किया गया। काफी समय बाद सेंसेक्स में असामान्य उछाल देखा गया, मुद्रास्फृति में बढ़त आया जहां डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ प्रशासन व्यवस्था में भी सुधार हुई है फिर भी हम कहते हैं कब आएंगे अच्छे दिन।
इन सौ दिनों में वर्तमान सरकार द्वारा कुछ अच्छे काम भी किये गए और कुछ में अमल करने की जरूरत भी है। आगे इनका कार्यकाल कैसा रहता यह तो वक्त ही बताएगा।
अमानत भाईजान अच्छे दिन जरुर आएंगे पर इसके लिए सब्र करना होगा।
ReplyDeleteअमानत जी आपका विश्लेषण सराहनीय है........हां..थोड़ा सब्र करना होगा।
ReplyDeleteसब्र का फल मीठा होता है......
ReplyDeleteअपने ब्लॉग के जरिये मोदी सरकार पर जो आपने विश्वास दिखाया है, आशा है मोदी जी उसपर खरे उतरेंगे और देश और खासकर युवाओं का भला करेंगे।
ReplyDelete