Friday, September 12, 2014

खतरनाक वायरस इबोला लेकर आया वैश्विक आपदा


इबोला एक खतरनाक वायरस है जिसका खतरा आज पूरी दुनिया भर में मंडरा रहा है. इसका संक्रमण होने के बाद लोगों का बचना मुश्किल है लगभग 90% मामलों में मृत्यु हो जाती है. अभी हाल में ही इबोला वायरस ने चार पश्चिमी अफ़्रीकी देशों गिनी, लाइबेरिया, सिएरा लियोन और नाइजीरिया को अपनी गिरफ्त में ले चुका है. 



विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इबोला वायरस  की चपेट में आकर इस साल अब तक 2100 लोगों की मौत हो चुकी है जिसमे 79 स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल है. स्थिति की गंभीरता को देखता हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अंतरराष्ट्रीय आपात की घोषणा की है और विश्व बैंक ने अफ्रीका के तीन पश्चिम देशों लाइबेरिया, सियरा लियोन तथा गिनी में फैले इबोला वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 20 करोड़ डॉलर की आपात सहायता देने की घोषणा की है. 

लगभग आज से 38 वर्ष पूर्व 1976 में अफ्रीका में पहली बार इबोला संक्रमण का पता चला था. कांगो की इबोला नदी के नाम पर इसका नाम इबोला पड़ गया. तब से अब तक 15 बार अफ्रीका में इबोला संक्रमण फ़ैल चूका है और हर बार कुछ कुछ सावधानियों तथा तौर-तरीकों को अपनाकर इबोला को महामारी बनने से रोकने में सफलता पाई जाती रही है. पहले की भांति इस बार भी इस संक्रमण को अफ्रीका में ही रोकने की तैयारी की जा रही है.

आखिर कैसे होता है ये इबोला यह जानना ज़रूरी है, इबोला संक्रमण संक्रमित खून,पसीना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से होता है. इसके प्राम्भिक लक्षणों में अचानक से बुखार आना, कमज़ोरी, मांसपेशियों में दर्द रहना और गला खराब होना शामिल है. इबोला संक्रमण से जोड़ो का दर्द, त्वचा का पीला पड़ जाना, बाल झड़ना, आँखों में पानी आना, तेज़ रौशनी सहन न कर पाना कॉलेरा डायरिया जैसे लक्षण नज़र आते है. इबोला वायरस शरीर के संपर्क में आते ही कोशिकाओ में प्रवेश कर जाता है और यह अपनी शक्ति को कई गुना बढ़ा लेता है. कई गुना बढ़ने के बाद ये सारे वायरस कोशिकाओ से निकल कर एक प्रकार के प्रोटीन को उत्पन्न करते है, जिससे शरीर के अंदर यह पूरी तरह से तबाही मचाते है. यह वायरस शरीर के विभिन्न भागों में चला जाता है जैसे की लीवर, गुर्दा और मस्तिष्क और यह इसकी क्षमता को कम कर देता है. 

चमगादड़ भी इबोला वायरस के प्राकृतिक संवाहक माने जाते है. ये बड़े चमगादड़ होते है जो खासकर दुनिया के उष्ण व उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाये जाते हैं. वायरस के संपर्क से खुद को बिना प्रभावित रखते हुए ये चमगादड़ दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं. इसके अलावा गोरिल्ला, चिंपांज़ी , चिकारा और शाही में भी इबोला संक्रमण के वायरस पाये गए हैं. 

अभी तक पांच प्रकार के इबोला वायरस देखने को मिले हैं जो इस प्रकार है
1.इबोला जायरे, 
2.इबोला सूडान
3.इबोला आइवरीकोस्ट
4.इबोला बूंदी बुग्यो, 
5.इबोला रेस्टन.
ये सभी वायरस अफ्रीका महाद्वीप में पाये जाते हैं, जबकि पांचवे प्रकार का 'इबोला रेस्टन' वायरस फिलीपींस में भी पाया गया है. यह वायरस मनुष्यों को ही नहीं बल्कि जानवरों को भी संक्रमित करता है।  
  
इबोला वायरस के अंतिम प्रभाव को यदि हम देखे तो आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव होने लगता है ,चमड़ी गलने लगती है और अंतत: पुरे शरीर में गलन होने लगती है जो मौत का रूप ले लेती है। ऐसी दर्दनाक मौत जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। 

इबोला वायरस के पहचान के लिए एलीसा, एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट्स,  सीरम न्यूट्रलाइज़ेशन टेस्ट्स, आर-टीपीसीआर, इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोपी आदि टेस्ट कराये जा सकते हैं.  इबोला वायरस से संक्रमण न हो इसके लिए संक्रमित व्यक्ति के रक्त या शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से बचना चाहिए विशेषकर सीरिंज वगैरह के उपयोग में सावधानी ज़रूरी है. इबोला वायरस से बचने के लिए अभी तक कोई भी स्थापित और पूरी तरह आज़माई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है ऐसे में सावधानी ही काम आ सकता हैं. 
 
अमेरिका और कनाडा ने मिलकर जानवरों पर एक जैडमेप नामक दवा का परीक्षण किया है और यह परीक्षण सफल रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दवा के प्रयोग की अनुमति दे दिया है. इस दवा को सबसे पहले अफ्रिका में लाइबेरिया के दो इबोला संक्रमित डॉक्टरों को दिया जाएगा. अभी यह दवा आम नागरिकों को मिलना मुश्किल है. ऐसे में मौत के सिवा दुसरा कोई विकल्प नहीं दिखाई दे रहा है. 

यदि हम वर्तमान स्थिति पर गौर करे तो विश्व स्वास्थ्य संगठन की 27 जुलाई, 2014 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, गिनी में 427 लोग इबोला से संक्रमित है और 319 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, सियरा लियोन में 525 संक्रमित है और 224 लोगों की मृत्यु हो चुकी है. लाइबेरिया में 249 मरीज हैं जबकि 129 की मृत्यु हो चुकी है. कुल मिलाकर इस वायरस से प्रभावित 1850 मामलों में 1200 लोगों की मृत्यु हो चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस मामले में गिनी, लाइबेरिया, सियरा लियोन और नाइजीरिया में इबोला संक्रमण को देखते हुए स्थिति पर काबू पाने तक दूसरे देशों के नागरिकों को इन देशों की यात्रा नहीं करने का सुझाव दिया गया है. गौरतलब है कि गिनी, लाइबेरिया, सियरा लियोन में लगभग 4700 भारतीय हैं, जहां से सबसे ज्यादा मामलें सामने आए है.


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