Tuesday, September 9, 2014

" जहां लड़की के जन्म पर मनती हैं खुशियां "

 
।।बेटी को मरवाऔगे तो दुल्हन क्हा से लाऔगे।।

हमारे जीवन में महिलाए एक कीमती संपत्ति की तरह हैं, क्योकिं वे दूसरों की परवाह करती हैं, वे हमे शिक्षा एवं संस्कार देती हैं, वे सबका भला सोचती हैं, वे चीज़ो को पता लगाने में माहिर होती हैं, वे सबसे अधिक संघर्ष करती हैं, वे दूसरों के लिए अपने खुशी का बलिदान तक देती हैं।


आज का सबसे गर्म मुद्दा है बच्ची बचाओ अभियान अगर हम असलियत की बात करते हैं तो इसमें सिर्फ पुरूष वर्ग ही शामिल नही है महिलाएं भी आगे हैं। मैं किसी आंकड़ों की बात नही कर रहा और ना किसी किये गये सर्वे की। जो बात सच है जिसे हम सब जानते है वो बात मैं बताना चाहूँगा। हां यह भी सत्य है कि बहुत बड़े स्तर पर गर्भ में भ्रुण हत्या होती है। यह एक कुप्रथा हैं जो बहुत साल पहले से ही चली आ रही है।
आज नही जब भी आपको होश आया हो तभी से याद करें की वृद्ध महिला के कोई  औरत अगर पैर छु रही होती थी तो वो वृद्ध महिला क्या आशिर्वाद देती थी कुछ है याद…. चलो मैं ही बता देता हुं वो कहती थी की दुधों नहाओं पुतों फलो। किसी ने मेरे सामने यह नही क्हा  कि तेरे घर में एक नन्हीं सी परी जन्म ले।

कोई भी महिला रही हो चाहे वह मेरी मां, बहन, बुआ कोई भी रही हो उसकी सबसे पहले ये ही इच्छा रहती है और रहती थी की मेरी कोख से एक सुंदर सा बेटा पैदा हो। और जब घर में बेटा पैदा होता है तो थालियां बजाई जाती है और लड़की के होने पर कुछ नही और थाली बजाने वाली हमारी माताएं बहने हैं।

यह कहानी राजस्थान के बाडमेर जिले के खच्चरखड़ी गाँव की हैं, जहां लड़की के जन्म  पर खुशियां तथा मिठाई बांटी जाती हैं। इस गांव में करीब 40 परिवार रहता हैं और बेटी की पैदाइश पर खास तरह के नृत्य का आयोजन कर खुशियां मनाई जाती हैं। लेकिन गांव में उच्च प्राथमिक विघालय न होने के कारण बेटियों की शिक्षा अधूरी रह जाती हैं। बस्ती में किसी के भी घर बेटी के जन्म पर गांव भर में गुड़ बांटा जाता हैं सामुहिक तौर पर भोजन की परंपरा का निर्वाह भी किया जाता हैं। इस जिले के कई गांव में अभी भी भ्रुण हत्या काफी प्रचलित हैं, जहां सदियों से बारात नही आयी हैं वही खच्चरखड़ी की लड़कियों के लिए अच्छे परिवार से रिश्तो की कोई कमी नही रहती। यहां की बेटियां हस्तशिल्प में सिद्धहस्त होती हैं। गांव के निवासीयों का कहना हैं कि सगाई से लेकर विवाह तक का सारा  खर्च लड़के वालो के तरफ से होता हैं। यहां तक की मेहर की राशी भी लड़के वाले अदा करते हैं। लड़की जितनी गुणवान होगी विवाह के वक्त उतनी ही अधित राशी प्राप्त होती हैं।

मेरा तो यह मानना है कि आदमी जितना स्वार्थी होता जा रहा हैं, उतनी ही उसके अंदर से मानवता खत्म होती जा रही हैं, और उसका परिणाम कि वह स्वार्थी मानव बच्ची को गर्भ में ही मार दालता है और अपने भगवान समान मां बाप को भी यतिम बना सकता है। यह सब स्वारथ का परिणाम है।
 

7 comments:

  1. अच्छा लिखा है...कुछ वैयाकरणिक अशुद्धियों को ठीक कर लें

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  2. i really appreciate your thought.. and i am looking forward to write on "how much do a woman support another woman"

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    1. जरूर...लिखों मुझे इंतजार रहेगा।

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  3. सोच आपकी बहुत बेहतरीन है और जो संदेश आपने अपने लेख के द्वारा दिया वो और भी बेमिसाल है......

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  4. आप सभी का धन्यवाद।

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  5. बहुत बढ़िया................

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