Tuesday, September 2, 2014

युवाओं में शादी के नकारात्मक प्रभाव...

भारत एक बहूसांस्कृतिक, बहूधर्मी समाज हैं। शादी के तरीके क्षेत्र ओर संस्कृति मे अलग हो सकते हैं। लेकिन मेरी चिंता यह नहीं हैं।

युवा शादी को कैसे वर्गीकृत करते हैं।
1. प्रेम विवाह
2. व्यवस्थित विवाह




 प्रेम विवाह क्या है? यहां दो विपरीत और समलौंगी एक दूसरे से प्रेम तथा मोहबब्त का इज़हार करते हैं, और प्रतिबद्ध होकर लंबे समय तक साथ रहने की कसमे खाते हैं। प्रेम विवाह के हमारे जीवन में कई लाभ हैं। जैसे, मज़बूत रिश्ते, आपस में सही समझ, सही सूझ बूझ के साथ निर्णय लेना, रिश्तों में अधिक स्वतंत्रता होना, धर्म और जाति अहम नहीं रह जाती। जहां हम लाभ की बात करते हैं वही नुकसान से पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता, नुकसान के तौर पर परिवार जनो का साथ न मिलना, वित्तीय परेशानी, धर्म के मामले पर विवाद, आपसी कलह को अनुभव किया जाता हैँ।
   भारत में प्रेम विवाह को समाज स्वीकार नही करता, किंतु हमारे देश में लगभग लोग पश्चिमीकरण को अपना चुके हैं। जिस कारण मां-बाप के खिलाफ युवा पी़ढ़ी लव मैरेज को लेकर सनकती जा रही हैं।

व्यवस्थित विवाह क्या हैं? विवाह जो लड़के और लड़की के परिवार वाले तय करते हैं। इस तरह के रिश्तों में स्थिरता होती हैं। व्यवस्थित विवाह के लाभ। वर और वधु के परिवार के बीच एक सही समझ, माता पिता के द्वारा लिया गया सही निर्णय, लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते और समाज में लोगो का दिल से स्वीकारना। व्यवस्थित विवाह के नुकसान, वक्त के अनुसार रिश्तों का बसना, आंतरिक परेशानी, दहेज की  समस्या।

जैसे ही शादी शब्द हमारे जुबान पर आता हैं, ज्यादातर देखा गया हैं कि लड़के अपना पल्ला पहले ही झार लेते है। वही दूसरी तरफ लड़कियां इस शब्द से मनमोहक हो उठती हैं। य़दी हम लड़को को देखे तो आज के य़ुवा लड़कियों को सिर्फ एक मनोरंजन का साधन मानने लगे हैं, जिस कारण लड़कियों पर होने वाले अत्यचार जैसे की बलात्कार, शोषण, भ्रूण हत्या जैसे घिनौने अपराध अपने चरम सीमा पर हैं। शादी से उनकी आज़ादी मानो छिन सी जाती हो।कहते है माता और पिता के इंतकाल के बाद ही उनके औलाद पूरी तरह से स्वतंत्र तथा आज़ाद हो जाते हैं, मैं उस आज़ादी की बात कर रहा हूँ, जहाॅ सुंदर होना जरुरी नहीं, जरुरत हैं तो बस हाथ बढ़ाने वालो की क्योकिं सुंदरता ह्रदय में होती हैं मेरे मित्रो चेहरे मे नहीं शायद आज के युवा पीढ़ी आज़ादी का सही मतलब ही नहीं जानते।
भारत के परिप्रेक्ष्य में अगर देखा जाए तो यहां के लड़कियों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई अंधविश्वास पनपते हैं, जैसे की लड़की का मांगलिक होना, सुंदर ना होना, दहेज देने में असक्ष्म होना।
कहते हैं भारत अविश्वसनीय देश हैं, उचित हैं, अविश्वसनीय तो हैं जिस कोख़ से जन्म लेते हैं उसे ही लज्जित करने वाला देश है हमारा भारत। ज़रा गौर किजिएगा...


9 comments:

  1. अभी भी कुछ व्याकरणिक अशुद्धियां हैं, उनको ठीक करें। आइडिया अच्छा है और आपके लेख की अंतिम लाइन बहुत ही प्रभावी है।

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  2. Do alag alag pahchan milkar jab ek pahchan ban jati hai tabhi ek atoot rishta kayam hota hai. shayad ise hi shaadi kahte hain.

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  3. Whatever marriage type we choose whether it is love marriage or arrange marriage,we should respect marriage as an institution.

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  4. today people are challenging marriage as an institution

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  5. आप सभी सज्ननो का धन्यवाद.... और मोहतरमा कृष्णा....no one is challenging the Indian marriage they are trying to control or overpower it...there is a difference between controlling and challenging...

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