Tuesday, September 9, 2014

भारत में कुपोषण-आखिर कब तक ?

क्या अन्न का एक दाना फेंकते वक्त हमने कभी यह सोचा है, कि आज भी हमारे देश में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें ये एक दाना भी नसीब नहीं होता है।
रोटी, कपड़ा और मकान यह हमारे देश के निर्माण का नींव थी। आजादी के 68 वर्ष के बाद भी हमारा देश एक कुपोषण रहित राष्ट्र नहीं बन पाया है। आज भले ही भारत ने कई मायनों मे एक नया मुकाम हासिल कर लिया हो, चाहे वह टेक्नॉलोजी के क्षेत्र में हो या फिर व्यापार-व्यवसाय के क्षेत्र में। पर आज भी हमारा देश गरीबी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है, जिनमे से एक बड़ी समस्या कुपोषण भी है। 


यूनाइटेड नेशंस स्टेंडिंग कमेटी ऑन न्यूट्रिशन के मुताबिक,दुनिया भर में बीमारियों के फैलाव में यदि कोई एक कारण सबसे ज्यादा जिम्मेवार है तो वह है कुपोषण। विश्व बैंक ने कुपोषण की तुलना ''ब्लैक डेथ'' नामक महामारी से की है।

वर्ष 1982 से लगातार, हर साल 1 से 7 सितंबर के बीच हमारे देश मे केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन का मुख्य उद्धेश्य देश मे कुपोषण के कारण, नतीजे और जागरूकता फैलाना है।

सवाल उठता है की आखिर कुपोषण है क्या?
जब किसी भी इंसान को साधारण काम करने पर शारीरिक रुप से कठिनाई हो या फिर सामान्य बीमारियों के खिलाफ लड़ पाने की क्षमता, या कुछ नया सीख पाने की क्षमता कम हो जाएं तो ऐसे व्यक्ति को कुपोषित श्रेणी में रखा जाता है। 

कुपोषण के कई कारण है-
पर्याप्त मात्रा मे भोजन न मिल पाना या फिर भोजन में विटामिन्स और पोषक तत्वों की कमी होना। विश्व मे कुपोषण का सबसे बड़ा कारण भूखमरी है। क्या आपको पता है हर आठ में से एक व्यक्ति इस पृथ्वी पर भूखे पेट सोता है।

फूड एंड एग्रीक्लचर ऑग्रेनाइजेशन के वर्ष 2013 कि रिपोर्ट के मुताबिक-
दुनिया में 84.2 करोड़ लोग भूखे हैं, जिनमे से 98 फीसदी लोग विकासशील देशों में रहते हैं, जिनमे से एक देश भारत भी है।

 हमारे देश मे भूखमरी के कई कारण हैं, जिसकी वजह से हमारा देश कुपोषण जैसी समस्या से लड़ पाने मे असफल है।
·        गरीबी के कारण पर्याप्त मात्रा में भोजन न जुटा पाना,
·        महंगाई के कारण हर दिन खाद्य सामग्रियों की बढ़ती कीमतें,
·        कृषि में कम निवेश होना,
·        अनाज भंडारण के कारण अकाल पड़ना,
·        पूरी जानकारी और जागरूकता की कमी।

कहते हैं बच्चे हमारा आने वाला कल होते हैं, वे हमारा भविष्य होते हैं पर हमारे देश में, बच्चों का अस्तितव ही खतरे में है। भारत में पूरी दुनिया मे पैदा हुए बच्चों की तुलना में 40 फीसदी पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे, कम वजन वाले पैदा होते हैं।

भारत में कुपोषण की चपेट में सबसे ज्यादा संख्या में बच्चे एवं ग्रामीण महिलाएं आती हैं। 

आंकड़ों के मुताबिक-

बच्चे
महिलाएं
भारत में पूरे दुनिया की तुलना में 33 फीसदी कुपोषित बच्चे रहते हैं।
भारत में 53.9 फीसदी ग्रामीण महिलाएं  अनीमिया से ग्रस्त हैं।
भारत में 22.7 फीसदी शिशुओं का वजन सामान्य से कम होता है ,जन्म के समय।
भारत में 40 फीसदी ग्रामीण महिलाओं का वजन सामान्य से कम है। 


ग्रामीण महिलाएं गर्भावस्था के समय भोजन में विटामिन्स और पोषक तत्वों के अभाव के कारण कुपोषण कि चपेट में आ जाती हैं, जिसके फलस्वरूप नवजात शिशु के कुपोषित होने की कई संभावनाएं होती हैं। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के अनुसार गर्भावस्था के आरंभिक दिनों से लेकर जन्म और बच्चे के दो वर्ष की उम्र तक उसका खास ख्याल रखना चाहिए।


आज कुपोषण के निवारण के लिए हमारे देश मे कई योजनाएं एवं गैर सरकारी संस्थाए कार्य़ कर रही हैं। भारत में लोगो को संपूर्ण भोजन मुहैया कराने के साथ-साथ जरूरत है, समुचित जानकारी और जागरुकता की।


6 comments:

  1. I think this should reach to our prime minister so that he should look into this matter, as malnutrition is more serious issue than any other issue in the country.

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  2. as we all know that health is really important for our mental growth.. and a particular section of our population is suffering from health related problems, government should look into this matter. this problem is not only because of poverty but also due to lack of awareness so health related programs and campaign should also run vibrantly.

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  3. nicely written, you have covered this issue holistically.

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  4. बहुत अच्छा है, बहुत सारी बातें सिखने को मिली

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  5. Good thinking, awareness of malnutrition among the people involved.

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