अभी हाल में हमारे प्रधानमंत्री जी ने यह घोषणा
की है कि आगामी वर्षों में लगभग हरेक गाँवों को इंटरनेट से जोड़ दिया जाएगा, लोग सूचना
प्राप्ति हेतु इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगें, हमारा भारत
विश्व में एक नई पहचान कायम करेगा, डिजिटल इंडिया के नाम से जाना जाएगा। बोलने लिखने में
कितना आसान है यह! यहां सबसे
पहले यह प्रश्न उठता है कि अभी हमारा ग्रामीण भारत इसके लिए कितना तैयार है, तकनीकी
रूप से कितना शिक्षित है? यदि हम गाँव की बात करें तो पाएँगें कि अभी साक्षरता का प्रतिशत भी कितने
राज्यों का जस का तस है, ऐसे में इंटरनेट का उपयोग कितना कर पाएंगे। लेकिन एक बात
तो तय है कि यह आगामी योजना से उच्च वर्गों एवं निम्न वर्गों दोनों को फायदा जरूर मिलेगा इसका कारण
यह है कि रिलांयस जैसी कंपनी को पूरे देश में इंटरनेट का जाल बिछाने का काम दिया
जा रहा है जिससे इंटरनेट सस्ते दामों पर उपलब्ध होगी गौरतलब है कि रिलांयस ने
संचार क्रांति का आगाज करते हुए मोबाईल को जन-जन तक सस्ते दामों मे उपलब्ध कराया
था।
एक वक़्त था जब हम अपने
प्रंखड कार्यालय या कोई अन्य कार्यालय कोई भी प्रमाण पत्र बनाने या किसी अन्य
कार्य से जाते थे तो वहां लिखित आवेदन करते थे और इसके उपरांत वहाँ से हस्तलिखित
प्रमाण पत्र मिलता था। यदि प्रमाण पत्र किसी कारणवश खो जाता था तो कार्यालयों के
कई दिन कई चक्कर लगाने पड़ते थे। मगर आज कम्प्यूटरीकृत होने के बाद आवेदन करना और
प्रमाण पत्र प्राप्त करना आसान हो गया है । इससे आम लोगों को भी फायदा पहुंच रहा
है। आज की तारीख में आप जिधर भी जाइये हर घर में आपको माबाईल उपलब्ध मिलेगा चाहे
वह अमीर हो या गरीब । अभी हाल में ही एक सर्वे में पाया गया है कि घर में शौचालय
हो या ना हो मोबाईल हर घर में उपलब्ध है । पहले जब ग्रामीण क्षेत्रों में
स्वास्थ्य संबंधित या किसी अन्य कारणों से आपातकालीन स्थिति आती थी तो ग्रामीणों
के लिए सूचना अग्रसरित करना मुश्किल हो जाता था लेकिन अब मोबाईल तकनीक के आ जाने
से लोग आसानी से सूचना को अग्रसरित कर समस्या से निजात पा रहे हैं ।
हमारे प्रधानमंत्री जी का जो ‘डिजिटल भारत’ का सपना है वह कारगर माध्यम साबित हो सकता है । इसके अंतर्गत देश का हर गाँव ब्रॉडबैंड से जोड़ दिया जाएगा, हर विश्वविद्यालय में वाई-फाई और हर विद्यालय में इंटरनेट की सुविधा होगी, टेलीमेडिसिन सुविधा प्रदान किया जाएगा जिससे लोग आसानी से डॉक्टर की सलाह ले पाएँगे, मोबाईल इंटरनेट के माध्यम से बैंक का संचालन कर सकेंगें, प्रत्येक नागरिक को आजीवन ऑनलाईन और प्रमाणन योग्य डिजिटल पहचान मिलेगी, सभी ग्राम पंचायतों में हाई स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराया जाएगा, प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप से सूचना प्रोद्योगिकी में रोजगार बढ़ेगी । यदि हम डिजिटल तकनीक की फायदे की बात करें तो इसके अनगिनत फायदे हैं। आज भी गाँव के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और सरकार डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिए समाधान की तलाश कर रही है। सरकार सूचना प्रोद्योगिकी के माध्यम सें घर-घर तक पहुँचना चाहती है,गरीब-से-गरीब व्यक्ति को भी इससें जोड़ना चाहती है । यहाँ प्रश्न उठता है,आख़िर क्यों ?
इसका उत्तर स्पष्ट है , प्रधानमंत्री
जी भलीभाँति इस तकनीक की ताकत से परिचित हैं, क्योकि इस तकनीक की मदद से उन्होनें
सोशल मीडिया जैसे कि फेसबुक,ट्वीटर,लिंक्डइन,ब्लॉग इत्यादी के माध्यम सें अपनी बात
को जन-जन तक पहुँचाया । उन्होनें देश में पहली बार 3डी तकनीक का इस्तेमाल कर सैकड़ों
सभाओं को संबोधित किया । लोगों में पूर्व सरकार के कार्यों के प्रति गुस्सा जगाया
और लोगों को एक समृद्ध भारत बनाने का सपना दिखाया । अंतत: परिणामस्वरुप उनकी
पार्टी पूर्ण बहुमत से जीत गयी ।
आज भी देश में लगभग 65
से 70 प्रतिशत लोग सूचना प्रोद्योगिकी से परिचित नहीं हैं और जो परिचित भी है वह
इसका इस्तेमाल करने से डरते हैं । आज भी बहुत से ऐसे लोग हैं जो पैसे एटीएम से
निकालने के बजाय बैंकों की शाखाओं में कतारबद्ध होकर पैसे की निकासी करवाते हैं ।
ऐसे लोगों की तादात देश में बहुत ज्यादा है औंर उसमें ज्यादातर गाँवो से संबंधित हैं।
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सूचना प्रोद्योगिकी के विकास के कारण
साईबर अपराध,अश्लील साईटो की भी वृद्धि काफी तेजी से हो रही है । लोगों को इंटरनेट
पर लेन-देन करने में भी डर बना रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि यह पूर्ण रुप से
सुरक्षित नहीं है । कुछ समस्याओं को छोड़कर इस बात से दरकिनार नहीं किया जा सकता है
कि यदि भारत के हरेक गाँव में इंटरनेट पहुँच जाए तो देश का विकास बेहतर ढंग से
होगा । आम लोगों तक सूचना आसानी से पहुँच पाएगी । इसके लिए मौजूदा सरकार को कुछ
ठोस कदम भी उठानें होंगें जैसे कि सूचना प्रोद्योगिकी को प्रत्येक विद्यालय, महाविद्यालय
में लागू कर शिक्षा का विषय बनाया जाए, साईबर अपराधों के लिए कठोर कानून हो और
इसका सख्ती से पालन किया जाए । प्रत्येक गाँव एंव शहरों में नि:शुल्क कम्प्यूटर सूचना
एंव शिकायत निवारण केन्द्रों की स्थापना की जाए । यदि हमारा देश ‘डिजिटल इंडिया‘ बन जाएगा तो कितना
स्वच्छ एंव पारदर्शी प्रशासन होगा ये तो वक़्त ही बताएगा ?

बहुत खुब...
ReplyDeleteधन्यवाद
Deletewell written...
ReplyDeleteधन्यवाद
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ReplyDeleteआर्यन जी, बिल्कुल सही 'डिजिटल इंडिया' का सपना साकार होने मे वर्षों लग जायगा।
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद इतनी जानकारी के लिए।
ReplyDeleteसूचनाप्रद, लेकिन अपनी लेखनी को थोड़ा और मनोरंजक बनाएं तो आप एक बेहतरीन ब्लॉगर बन सकते हैं।
ReplyDeleteबिल्कुल मैं आगे अमल करूंगा...
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