हम में से ज्यादातर लोगों
को पता है कि भारत की पहली फीचर फिल्म दादा साहेब फाल्के द्वारा निर्देशित राजा
हरिश्चंद्र है, पर क्या आपको पता है किसी भारतीय द्वारा बनाई गई पहली फिल्म पुंडलिक
थी जिसके निर्देशक दादा साहेब तोरने थे| यह फिल्म राजा हरिश्चंद्र से लगभग एक
वर्ष पहले 18 मई 1912 को रिलीज हुई थी| पुंडलिक को कोरोनेशन थिएटर (बॉम्बे) में
दिखाई गई थी| पर कुछ कारणों से फिल्म इतिहासकारों ने इसे भारत की पहली फिल्म नही
माना|
दरअसल तोरने ने रामराव
बालकृष्ण कीर्तिकर और नानाभाई गोविन्द मित्रे के साथ मिलकर फिल्म बनाया| पुंडलिक
रामराव बालकृष्ण कीर्तिकर द्वारा लिखा गया नाटक था| दादा साहेब तोरने उस समय बिजली
विभाग में कार्यरत थे| नाटक से उन्हें प्रेम था इस लिय पूर्वाभ्यास में जाया करते
थे| ऐसे ही बातो-बातो में एक दिन उनका ध्यान चलते-फिरते चित्रों की ओर गया,
उन्होंने सोंचा कि क्यों न पुंडलिक नाटक को चलती हुई छाया का स्वरुप दिया जाए?
उन्होंने लंदन की बॉर्न एंड शेफर्ड कंपनी से एक हजार रुपये में कैमरा और चार हजार
फुट की रील मंगाया| लंदन से ही जॉनसन नाम के एक छायाकार को भी बुलाया गया| फिल्म की शूटिंग मुंबई के वेस्ट एंड के आसपास
की गई| पुंडलिक नाटक का दृश्य एक के बाद एक जरी रहता और कैमरामैन उसे अपने कैमरे
में उतारते रहते| पुंडलिक कुल मिला कर तीन रील(1200 फुट) की फिल्म थी| शूटिंग के
बाद इसे लंदन की बॉर्न एंड शेफर्ड कंपनी में भेजा गया| वहां से वापस आने के बाद
कोरोनेशन थिएटर में इसे दिखाया गया| फ़िल्म के विषय में लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया
थी|
ऐसा कहा जाता है कि उस वक्त
फिल्म की सिर्फ एक ही कॉपी बनाई गई थी| दुर्भाग्यवश एक थिएटर में,जब इसे दिखाया जा
रहा था वहां आग लग गई| जिसमे पुंडलिक की एक मात्र कॉपी जल कर रख हो गई| परिणाम यह
हुआ कि इस फिल्म की कोई भी भी रिकॉर्ड नही बची और इसके साथ इस फिल्म का नाम भारतीय
सिनेमा इतिहास से “तथाकथित” तौर पर मिट गया|
जो नहीं दिखता वो नहीं बिकता.... बड़े अफसोस की बात है....
ReplyDeleteजिसमे पुंडलिक की एक मात्र कॉपी जल कर रख हो गई|
ReplyDeleteइस वाक्य को सुधारें
अच्छी जानकारी है लेकिन नयेपन का अभाव। जरा विचारमंथन करें और उन विचारों को अपने ब्लॉग में उतारें।
ReplyDeleteअच्छा लिखे हो।
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