Thursday, October 17, 2013

गरीब ही बंधुआ मजदूर क्यों ?

बंधुआ मजदूरी हमारे देश की बहुत बड़ी समस्या है।इस समस्या से हमारे देश के भविष्य अर्थात बच्चे शोषित हो रहे है।खेलने,पढने की उम्र में उन्हे मजबूरन दूसरे के घरों में काम करना पड़ता है ,उनका बचपन गुलामी के जंजीरो में बंध कर रह गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार 2009से 2011 के बीच भारत से कुल 1,77,670 बच्चे गायब हो गए यानि औसतन रोज 162 बच्चे गायब हो रहे है।यह हमारे लिए बहुत ही चिंतनीय विषय है।गृह मंत्रालय द्वारा पेश किए गए इन आंकड़ों के मुताबिक लगभग 32 फीसदी बच्चे कभी घर वापस नही लौट पाते।
 
आंकड़ों के अनुसार यह साबित हो चुका है कि गुमशुदा बच्चों का पता लगाने के लिए जिपनेट जैसे वेबसाइट भी नाकाम साबित हो रहे है, जिसपर सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है।एक रिपोर्ट के अनुसार 15 अप्रैल 2012 में लगभग 1,146 बच्चों की गुमशुदगी दिल्ली पुलिस के व्दारा दर्ज की गयी लेकिन अबतक 529 बच्चों का पता नही मिल पाया है।ये बच्चे अंग व्यापार या भिखारियों के जाल में फंस जाते हैं, जहां से उनका निकलना मुश्किल हो जाता है।उनका जिंदगी नर्क बनकर रह जाता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली से बच्चों का अपहरण किया जाता है ,और तीन-चार हजार रूपए में पश्चिमी उत्तर प्रदेश,हरियाणा के किसानों के हाथों बेच दिया जाता है।और वे लोग जबरदस्ती उन बच्चों से खेतों में काम करवाते है।इन बच्चों को भरपेट खाना भी नही देते और प्रताड़ित भी करते है।सरकार भी इन परेशानियों को दूर करने की कोशिश कर रही है इसके बावजूद भी स्थिति नही सुधर रही है।दिल्ली में एक गैरसरकारी संस्था “बचपन बचाओं आंदोलन”चलाया जा रहा है वो भी बेअसर साबित हो रहा है।
 
अत:अब हमे इन बच्चो के लिए कुछ कारगर उपाए करने की जरूरत है ताकि इन बच्चों के अंधकारमय जीवन में उजाला आ जाए।अत: सोच बदलिए कि गरीब गरीब ही रहेंगे उन्हे भी जीने का हक है।

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