Thursday, October 17, 2013

लड़कियां ही क्यों, समाज का बोझ ?

हमारे समाज में आए दिन बहुत सारी कुरीतियां देखने को मिलती है, लेकिन सबसे बड़ी बात देखने को मिलती है वो है लड़के-लडकियों में भेदभाव। आदिकाल से ही हमारे समाज में लड़कियों को भोग-विलास की वस्तु माना जाता रहा है।



आज तक शायद लोग इसी सोच पर जी रहे है ,कि लड़कियों को समाज में बराबरी का हक नही है। हमारे समाज की कोई भी घटना जो लड़के-लड़कियों से संबंधित घटती है, तो दोष लड़कियों के उपर ही मढ़ दिया जाता है, लेकिन वास्तविकता कुछ और होती है, उदाहरण स्वरुप देखे तो लड़कियों के साथ अगर छेड़खानी होती है तो लोग लड़कियों को ही दोषी ठहराते है। मैने अपने पैतृक गांव में इस तरह की घटनाओं को देखा कि लड़कियां शाम को पढने जाती हैं, और देर रात तक पढ कर घर लौटती है तो लोग उसे बुरी नजर से देखते है और झूठा लांछन लगाते है कि लड़की बदचलन है, लड़कियां अगर लड़कों से विचार-विमर्श करती हैं तो भी लोग गलत नजर से ही देखते है।घर का भी अगर कोई काम होता है तो बोला जाता है तुम लड़की हो और ये तुम्हारा काम है। खाने-पीने के मामलों में भी ऐसा ही होता है, अगर कुछ अच्छा खाने को रहता है तो लड़कों को पहले दिया जाता है अगर उनके खाने के बाद बच जाता है तो लड़कियों को दिया जाता है |

 
पढाई में भी लड़कों को अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढाया जाता है तो वहीं लड़कियों को सरकारी स्कूलों में पढाया जाता है। और उनका सोच भी यही रहता है कि लड़कियां ज्यादा पढ-लिखकर क्या करेंगी वैसै भी उन्हे तो चूल्हा-चौका ही संभालना हैं।लड़कियां अगर कुछ बातों पर खुलकर बोलना चाहती है तो उनके ही मां बाप के व्दारा ही चुप करा दिया जाता है। 2011 के रिपोर्ट के अनुसार 15000 लड़कियों को देह व्यापार के उद्देश्य से हरियाणा और पंजाब भेजा गया।  इन आंकड़ों से यह पता लगाया जा सकता है कि अभी भी लड़कियों को भोग-विलास का ही वस्तु माना जा रहा है। 

 
यह बहुत ही शर्म की बात है कि आजादी के 66 साल बाद भी हमारे देश में लड़कियों की स्थिति इतनी बदतर है। आज लड़कियां जागरुक हो गई है, अपने हक और सम्मान को लेकर खुलकर बोलने लग गई है ये बातें सिर्फ बोलने-कहने तक ही सीमित रह गई है। अत:सोच बदलिए कि लड़कियां कोई भोग -विलास की वस्तु नही बल्कि आपके समाज के बराबरी के हकदार है।

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