Saturday, March 25, 2017

एक प्रयास



बहुत सही कहा है किसी ने कि

औलाद वालों को इसने बेऔलाद कर दिया और बेवक्त जिंदगी से आज़ाद कर दिया.
मत छु इसे, ये जहर है मेरे दोस्तों, इसी शराब ने कईयों का घर बर्बाद कर दिया.



बिहार दिवस बिहार वासियों के लिए अत्यंन्त गौरवमयी दिन होता है और होना भी चाहिए. रोशनी की चका-चौंध के बीच हर वर्ष की तरह इस बार भी बिहार दिवस का शानदार आगाज़ किया गया. माननीय मुख्यमंत्री जी ने इस वर्ष का उत्सव नशा मुक्ति को समर्पित कर के, दर्शक-दिर्घा में बैठे लोंगो की खूब तालियॉ बटोरी. मानव –श्रृखंला में चार करोंड़ लोगों ने एकजुटता दिखाई, एकजुटता दिखाने के पीछे एक अटुट विश्वास था. और ये विश्वास किसी और का नही ब्लकि इस जहर के कारण बर्बाद हो रही उन लाखों अबलाओं का था जो रोशनी की एक किरण देख कर, खुद की जिंदगी में भी उजाले की आस लिए निकल पड़ी थी. ये विश्वास उन बच्चों का था जो घर के दरवाजे के पीछे से अपनी मॉ के साथ हो रहे हृद्य-विदारक व्यवहार को देख कर कॉप रहा था.यह विश्वास उस बुढ़े मॉ-बाप का था, जिनकी झलफलाती आंखें जिंदगी के अंतिम क्षणों में भी एक नया सवेरा देखने के इंतजार में खुली थी. 5 अप्रैल 2016 को पुर्ण शराबबंदी लागु करने का ऐलान कर माननीय मुख्यमंत्री जी ने खुशहाल बिहार की ओर एक और कदम बढ़ा दिया.
                                           आगामी 5 अप्रैल 2017 को बिहार पुर्ण शराबबंदी कि दिशा में पहला मील का पत्थर होगा. हालंकि शराबखोर और शराबविक्रेताओं के धर पकड़ से हुई शुरुआत आज भी उसी  रफतार में जारी है. इसका ताज़ा उदाहरण गॉंधी मैदान के पास 95 लीटर शराब की बरामदगी है. इस तरह के और भी उदाहरण आए दिन अखबारों में दिख जाते है. सीधे तौर पर तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन एक आशंका जरुर वयक्त किया जा सकता है क्योंकि हाल ही में आई बॉलिवुड फिळ्म रईस में पुलिस हर महिने एक ट्रक शराब पकड़ती है. जिसे शराब कारोबारी की मेहरबानी के रुप में दिखाया गया है.
खैर ये अभियान का एक पहलु है. अगर दुसरे पहलु पर गौर करे तो डीएनऐ द्वारा इन छह जिलों पर किए गए सर्वे मे ये समाने आई है कि शराब बंदी के बाद क्राईम –मर्डर, सड़क हादसे घरेलु हिंसा, के साथ-साथ चोरी में भी भारी मात्रा में कमी आई है.

               मैं इस लेख के माध्यम से बस इतना कहना चाहुंगी कि उन लाखों-करोड़ों खोखले हो चुके घरों को जिस खुथहाल इमारत में तबदील करने की कोशिश मुख्यमंत्री जी ने शुरु की है उसमें अगर हम सभी एक-एक उम्मीद की ईट भी जोड़े तो इमारत निश्चीत ही बुलंद बनेगी.
जरुरत है तो बस, एक प्रयास की ...........................

2 comments: